प्रोजेक्ट वर्क
केजीबीवी में जब भी लड़कियों के बीच जाते है तो महसूस होता
है कि उन्हें बातें करके बहुत अच्छा लगता
है। बातों के जरिये ज्यादा से ज्यादा जानकारी लेना चाहती है। नई-नई जानकारी लेकर
अपने ज्ञान का दायरा बढ़ा लेना चाहती है। उनके सवाल-जवाब शुरू होने में ज्यादा वक्त
नहीं लगता है। जैसे-जैसे उनके सवालों के जवाब मिलने लगते है तब उनका उत्साह और
खुशी दुगुनी हो जाती है। नज़दीकियाँ और बढ़ जाती है। झिझक जैसी कोई चीज नजर नहीं आती
है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से हम भी तो यही चाहते है कि लड़कियां
ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करें, खोजे और खुशी से सीखें। प्रोजेक्ट वर्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कड़ी है। यह विषयों
का दायरा तो बढ़ाता ही है साथ ही समझने, सीखने के नए आयाम उपलब्ध करवाता है।
शिक्षा का उद्देश्य यही है लड़कियों के व्यक्तित्व का विकास
हो, मिलकर काम करें, अपने आप से खोजना सीखें, विषय को अन्य विषयों से जोड़े, आत्मविश्वासी बने संभवतः यह सभी
गुण प्रोजेक्ट वर्क करने के दौरान उभरते है। लड़कियाँ खुशी के साथ सीखने की
प्रक्रिया में लगी ही रहती है साथ ही टीचर को भी नई चीजे जानने, पढ़ने का व लड़कियों के और करीब
जाने का एक और मौका हाथ में होता है।
हम सभी अपनी-अपनी संस्कृति के साथ पले-बढ़े है। जब भी अन्य
राज्यों के लोगों से मिलने का मौका मिलता है उनकी संस्कृतियों को भी पहचानने लगते
है। खान-पान, रहन-सहन को स्वीकार ने लगते है। हमारी
संस्कृति की पहचान का एक और अहम हिस्सा है- नृत्य। लोक- नृत्य हमारी संस्कृति की
पहचान है। प्रत्येक प्रांत के अपने लोकनृत्य होते हैं लेकिन अब लोक नृत्य प्रांतो
के दायरे में रुके हुए नहीं है दूसरे प्रान्तों तक तक फैलने लगे है। एक प्रांत
दूसरे प्रांत के लोक नृत्य को अपना रहे है या यूं कहे कि दूरियाँ कम होने लगी है
तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। गरबा, भांगड़ा इसका सबसे बड़ा उदारहण है।
पाठ्यक्रम में हमारी संस्कृति को बड़े पैमाने पर शामिल किया
गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सबसे खास होते है डांस यानि नृत्य। केजीबीवी
में लड़कियों की झिझक भी कुछ हद तक डांस करने के दौरान दूर होती है। डांस में लड़कियों
की बहुत रुचि होती है। यदि डांस प्रोजेक्ट वर्क पर काम किया जाए तो इसको करने प्रक्रिया
की यात्रा भी कम रोचक नहीं होगी।