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Sunday, October 9, 2011

क्या डायन होती है |

हमारे संविधान में महिलाओं को पूरा सम्मान देने की बात कही गयी है लेकिन अफ़सोस की  बात है कि संविधान में जो बातें लिखी गयी है वो बातें आजादी के चौसठ साल बाद भी उन लोगो तक नहीं पहुंची है जो महिलाओं को अब भी इंसान नहीं समझते | कई महिलाओं के साथ आज भी जानवरों जैसा बर्ताव होता रहता है| वे जानवर की तरह मूक रहकर सारे जुल्म सहने को मजबूर है| पशु-पक्षियों की रक्षा के लिए तो मेनका गाँधी डटकर सामने खड़ी हो गयी है| आम आदमी उन्हें सताने से पहले शायद मेनका जी को याद कर लेता होगा या उसे याद दिला दिया जाता होगा |
ऐसा नहीं है कि महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया गया हैं | महिलाओं के आत्मसम्मान के लिए बहुत सारे कानून भी बने हैं | सभी धर्मों,धर्म ग्रंथो मे भी अपने-अपने तरीके से सम्मान देने की बात कही गयी है | लेकिन क्या महिलाएं अत्याचारों से मुक्त हो पाई ?
महिलाओं को ससुराल पक्ष द्वारा कभी दहेज के नाम पर जहर पिलाया जाता है,धमकाया जाता है, जलाया जाता है या फांसी दे दी जाती है | कभी भूत-प्रेत निकालने के नाम पर उसे गर्म चिमटों से दागा जाता है और कभी डायन कहकर मार-पीट करके प्रताड़ित किया जाता है | घरेलू हिंसा तो इनके खाते मे बोनस के रूप में अधिकार की तरह मिली हुई है|
किसी महिला के साथ कोई घटना घटती है या तो उसे गाँव की इज्जत कह कर वहीँ दबा दिया जाता है | यदि किसी तरह घटना सबको पता चल जाती है तो आरोपी किसी तरह छूटने का प्रयास करता है रुपया-पैसा देकर छूट भी जाता है| पीड़ित को धमकियां देना तो आम बात है| किसी तरह मिडिया तक बात पहुँच जाती है तो वो कर्तव्य निभाते हुए एक-दो बार न्यूज में जिक्र करते है | यदि किसी संगठन ने घटना को हाथों-हाथ लिया तो सुर्खियाँ बन जाती है नहीं तो पीड़ित महिला अपनी किस्मत को कोसती जिन्दगी भर महिला होने का बोझ ढोती रहती है|  
        मुझे तो भारत की दो तस्वीरे साफ दिखाई देती है | एक तरफ कुछ महिलाएं शिक्षा रूपी हवाईजहाज पर बैठकर अंतरिक्ष की यात्रा करते हुए चाँद पर पहुँच कर अन्य महिलाओं को वहाँ पहुँचने के लिए प्रेरित कर रही है तो दूसरी तस्वीर इतनी भयानक है कि कोई कोई सपने मे भी इसको नहीं देखना चाहता | कहने को तो हम इक्कीसवीं सदी मे चल रहे है लेकिन डायन जैसी घटनाएँ देखते है तो लगता है जितने हम आगे चले थे उतने ही पीछे पहुँच रहे है | मैं जिस घटना का जिक्र कर रही हूँ उसे देख-सुन कर ही रोंगटे खड़े हो जाते है | जिसके साथ ये  क्रूरतम व्यवहार हुआ है उसकी व्यथा की तो हम कल्पना भी नहीं कर सकते |        
एक न्यूज को मैं ज्यों का त्यों ही दे रही हूँ | आप ही सोचिये क्या ऐसी घटना अपने साथ घटने  की कल्पना मात्र से ही रूह नहीं कांप जायेगी ...............

सुपौल :   भपटियाही थाना क्षेत्र के झिल्ला-डुमरी गांव में  दशहरा के दिन राधा देवी (30) नामक महिला की पड़ोस के ही कुछ लोगों ने डायन बताकर  जमकर पिटाई की और उसे मैला घोलकर पिला दिया।

घटना के वक्त पीडि़ता अपने चार मासूम बच्चों के साथ मंदिर मे मां दुर्गा के  दर्शन करने जा रही थी। घटना को लेकर पुलिस ने पीडि़ता के बयान पर आधा दर्जन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है । पीडि़ता का इलाज भपटियाही अस्पताल में चल रहा है।

क्या है मामला:

पीडि़ता राधा देवी के पति हरिनारायण मुखिया ने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले उपेन्द्र मुखिया की भैंस ने दूध देना बंद कर दिया था। उसको लेकर उपेन्द्र, रामचन्द्र, सुलेखा देवी एवं उसके परिवार के अन्य सदस्य उसे डायन कहने लगे। वे लोग भैंस का दूध वापस लाने को कह रहे थे। इसी को लेकर बार-बार मारने पर उतारू थे।

पीडि़ता ने बताया कि उसका पति विकलांग है और अभी पंजाब में है। बुधवार के 4 बजे संध्या में वह अपने चारों बच्चे को ले मां भगवती का दर्शन करने जा रही थी। सड़क पर पहुंचते ही आरोपियों ने उसे घेर लिया। उसकी बुरी तरह पिटाई की और मैला घोलकर जबरन पिला दिया।

उसके बाद वे लोग बच्चों के साथ भी मारपीट करने लगे। बेहोशी की  हालत में कुछ लोगों ने उसे नहलाया और थाना तक ले गए । पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जैसे ही पीडि़ता घर पहुंची कि आरोपी ने फिर उसे एवं उसके बच्चे का पिटाई की।

शुक्रवार के सबेरे थानाध्यक्ष सुनील कुमार स्थल पर पहुंचे। महिला की हालत देख उसे तत्काल इलाज हेतु भपटियाही अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि पीडि़ता का अस्पताल में इलाज चल रहा है ।
अक्सर देखा गया है कि ऐसी घटनाएँ उन महिलाओं के साथ घटती है जो अकेली रहती है या विधवा है या जिसके पास जमीन-जायदाद है या जिसका पति विकलांग है | महिलाएं कब तक अग्नि परीक्षा देती रहेगीं ? क्या कभी परीक्षा मे पास हो पाएंगी ? क्या कभी ऐसा समाज बन पायेगा जिसमें महिलाओं को चेन से जीने दिया जाये ?

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