आज फादर्स डे है | आज अभी अपने-अपने तरीके से इसे सेलिब्रेटकर कर रहे है | आज की व्यस्तता भरी जिन्दगी में रिश्ते भी व्यस्त हो गए है रिश्तों के बिना रहना भी मुश्किल है | एक-एक दिन सभी रिश्तों को देना उन्हें याद करना सेलिब्रेट करना बहुत ही अच्छा विचार है | आज के समाचार पत्र में दो समाचार पढ़े | फादर्स -डे और बेटी को सीने से लगा कर मार दी गोली ! इससे चार दिन पहले वह अपनी पत्नी और एक बेटी को भी मार चूका था | गोली क्यों मारी ? वजह चाहे जो रही हो | लेकिन उस पिता के बारे में सोचने पर एक बात तो समझ में आती है कि वो अपनी बेटियों को चाहता बहुत था | पिता शायद अपनी जिन्दगी से इतना हतास हो गया था कि उसे ये जिंदगी छोड़ना ही बेहतर लगा | मोत के बाद बेटियों का क्या होगा | बेटियों को बाद में कोई तकलीफ न हो इसलिए उनको भी साथ ले जाने का विचार बनाया | शायद न भी बनाया हो हालत ही ऐसे हो गए हो तब ही तो दूसरी बेटी को चार दिन बाद में अपने सीने से लगा कर ले गया | उसकी उस समय कि मन स्थिति समझ पाना मुश्किल है | पिता होने के नाते उसने अपनी बेटियों के भविष्य के लिए सपने भी पाल रखे होंगे | जब जिन्दगी में चुनैतियां ने पाँव पसारे तो उसका सामना नही कर सका यहाँ तक की उसने अपने परिवार में भी उस पर बात नही की अ हो सकता था उसका कोई हल निकल जाता लेकिन आज-कल लोगो ने आपस में संवाद करना बंद कर दिया है | आज कल सब अपने आप में सिमट गए | सुनने-सुनाने का समय किसी के पास नही है कोई होसला करके किसी को कुछ कहना भी चाहे तो गंभीरता से कोई सुनता नही है और शायद ये भी खा जाता है ये अपना दुखड़ा दूसरों के सामने रोता है | लेकिन इस पिता ने अपने पिता के बारे में नही सोचा उनके दिल पर क्या गुरेगी उसके पिता एक अनुभवी जिन्दगी जी चुके है उनके पास उसकी समस्याओ का हल जरुर होता यदि वो उन्हें बताता तो | एक पिता दूसरे पिता को दुःख पंहुचा कर इस दुनिया से चला गया |
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