विश्व में आज ऐसा कोई नही होगा जो बाबा रामदेव को नहीं जानता | जाने भी क्यों ना, उन्होंने लोगो की सेहत को आज से कई साल पहले मुद्दा बनाया था | लोग लंबे समय तक निरोग जिंदगी जिए और पूर्ण योवन का आनंद ले इसके लिए बाबा योग आंदोलन लेकर आये थे और ये आंदोलन खूब चला..,विदेशो तक चला... और आज भी घर-घर में चल रहा है... और जब ये आंदोलन व्यक्तिगत रूप से व्यक्ति से जुड़ा है तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहेगा | व्यक्ति का भला हो और लोग ही ना जुड़े ऐसा कैसे हो सकता है | लोगों ने बाबा को सिर आँखों पर बैठाया है | बाबा ने, लोग रोग मुक्त रहे इसके लिए दवाईयां भी बनाई है | लोगों ने भी बाबा के प्रति अपना कर्तव्य समझा और उनके दवा के बिजनेस को खूब बढ़ाया भी हैं |
चार जून से बाबा एक और आंदोलन को चलाने के लिए प्रतिबद्ध हुए है इसमे भी बहुत से लोग शामिल हुए है | इस आंदोलन का मुद्दा बहुत ही खास है... भ्रष्टाचार को खत्म करवाना | और भी मुद्दे है जैसे- विदेशी बैंको में जमा लाखों करोड़ रूपये को राष्ट्रीय सम्पति घोषित कर वापस लाया जाये | काले धन को विदेशों से वापस लेन के लिए संसद से एक विधेयक पारित कराया जाये | फास्ट ट्रेक कोर्ट में भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई कर एक साल में फैसला दे दिया जाये | शिक्षा का माध्यम राष्ट्रभाषा व मातृभाषा हो | इस बार का आंदोलन बहुत ही खास है खास इस मायने में कि एक तो बाबा आंदोलन को सफल बनाने के लिए अनशन कर रहे है और दूसरा बाबा की सीधी-सीधी लड़ाई सरकार से ही है |
सरकार चाहती है कि बाबा आंदोलन न करे और आंदोलन करना ही चाहते है तो अनशन न करे | लेकिन बाबा तो ठहरे हठयोगी | एक बार सोच लिया है तो करना ही है | सरकार दोहरी होकर बाबा से हाथ जोड़कर खूब विनती कर रही है | सरकार चाहती है बातों से ही बात बन जाये लेकिन बाबा बिना कार्यवाही के अपनी जगह से नहीं हिलने वाले |
बाबा ने अनशन के लिए मंच भी शानदार बनाया है यहाँ एक पंथ तीन काज तो होंगे ही... अनशन...योगा...और राजनीति | मेरे अनुमान से एक मुद्दे को छोडकर पूरी जनता बाबा के साथ है | क्योंकि जनता को इस से सरोकार है | लेकिन कुछ लोग मेरे जैसे भी होंगे शिक्षा की बात पर सहमत नहीं होंगे | साईन्स में ऐसे शब्द है जिनका मातृभाषा में नाम हो ही नहीं सकता | ऐसा ही इंजीनियरिंग के साथ है | इसमें सब पार्ट्स विदेशी है तो भाषा भी वैसी ही होगी | कौन करेगा इन सबका ट्रांसलेट | ज्ञान के विस्तार के लिए पुस्तके तो पढ़ी ही जाती है जोकि अधिकांश इंग्लिश में है तब कैसे संभव है कि मातृभाषा में ही सब कुछ हो... इस पर तो सोचना ही होगा ?
बाबा की दुकानदारी एक दिन सब को समझ आ जायेगी . लोकनायक बनने के लिए बाबा को अभी बहुत चीज़ें अपने में धारण करनी होंगी जो अभी उनमे नहीं है .
ReplyDelete